BNS Section 356: भारत में किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुँचाना, झूठी बातें फैलाना या अपमान करना आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) कहलाता है। यह अपराध न सिर्फ व्यक्ति की इज्जत खराब करता है बल्कि सामाजिक सद्भाव भी बिगाड़ सकता है।
पुराने कानून में IPC 499 और 500 आपराधिक मानहानि को परिभाषित और दंडित करते थे। अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 में धारा 356 ने IPC 499/500 की जगह ले ली है। नया कानून भाषा को थोड़ा स्पष्ट और आधुनिक बनाया गया है, लेकिन मूल प्रावधान लगभग वही रखे गए हैं।
यह आर्टिकल BNS Section 356 को आसान हिंदी में विस्तार से समझाएगा – परिभाषा, सजा, IPC 499/500 से तुलना, exceptions, उदाहरण, landmark cases (जैसे Rahul Gandhi case), दुरुपयोग, बचाव और व्यावहारिक सलाह के साथ।

IPC 499/500 vs BNS Section 356 की पूरी तुलना
| विषय | पुरानी IPC 499/500 | नई BNS Section 356 | क्या बदला? |
|---|---|---|---|
| अपराध का नाम | Criminal Defamation | Criminal Defamation | नाम वही |
| परिभाषा | किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाली बात | किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाली बात | भाषा ज्यादा स्पष्ट |
| सजा | 2 साल तक कैद + जुर्माना या दोनों | 2 साल तक कैद + जुर्माना या दोनों | कोई बड़ा बदलाव नहीं |
| जमानत | जमानती (bailable) | जमानती (bailable) | कोई बदलाव नहीं |
| FIR | Non-cognizable (कुछ राज्यों में cognizable) | Non-cognizable | कोई बड़ा बदलाव नहीं |
| Exceptions | 10 exceptions | 10 exceptions | कोई बदलाव नहीं |
| Compoundable | Compoundable | Compoundable | कोई बदलाव नहीं |
BNS Section 356 की विस्तृत व्याख्या
धारा 356 BNS कहती है कि कोई भी व्यक्ति, जो जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाली बात कहे, लिखे, संकेत करे या प्रकाशित करे, वह आपराधिक मानहानि का अपराधी माना जाएगा।
आपराधिक मानहानि कब मानी जाती है?
- झूठी बात फैलाकर किसी की इज्जत खराब करना
- लिखित, बोली गई, सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो या इशारे से अपमान करना
- ऐसी बात जो व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाए
सजा: 2 साल तक कैद, या जुर्माना, या दोनों।
जमानत: जमानती (bailable) FIR: Non-cognizable (पुलिस बिना अदालत के आदेश के FIR नहीं दर्ज कर सकती) Compoundable: दोनों पक्ष राजी हों तो समझौता हो सकता है

BNS 356 के रोज़मर्रा के उदाहरण
- सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के बारे में झूठी अफवाह फैलाना।
- किसी नेता या सेलिब्रिटी के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट करना।
- किसी की निजी जिंदगी के बारे में झूठी खबर प्रकाशित करना।
- ऑफिस या समाज में किसी के चरित्र पर सवाल उठाना।
- राजनीतिक भाषण में विरोधी को बदनाम करना।

अगर तुम पर BNS 356 लग गई हो तो क्या करोगे?
- तुरंत वकील से मिलो।
- ये साबित करो कि आपकी बात सत्य थी या अच्छे इरादे से कही गई थी।
- 10 exceptions (सत्य, सार्वजनिक हित आदि) का हवाला दो।
- जमानत आसानी से मिल सकती है क्योंकि यह जमानती अपराध है।
- FIR quash के लिए हाई कोर्ट में याचिका डालो।
अगर तुम्हारी मानहानि हुई हो तो क्या करोगे?
- सभी सबूत (पोस्ट, वीडियो, गवाह) इकट्ठा करो।
- मजिस्ट्रेट के पास private complaint दायर करो।
- सिविल सूट (मानहानि का मुआवजा) भी दायर कर सकते हो।
- अगर सोशल मीडिया पर है तो प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करो।
Conclusion
BNS Section 356 आपराधिक मानहानि का नया प्रावधान है। यह कानून व्यक्ति की प्रतिष्ठा की रक्षा करता है लेकिन Freedom of Speech को भी ध्यान में रखता है। अगर आपके साथ कोई मानहानि का मामला है या आपके खिलाफ केस चल रहा है, तो तुरंत अनुभवी वकील से सलाह लें। penalcodedetail.com पर और धाराएँ पढ़ते रहो – हम तुम्हारे साथ हैं। 🙏
FAQ – सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल
BNS Section 356 क्या है?
आपराधिक मानहानि की धारा, जो किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुँचाने पर लगती है।
BNS 356 में सजा कितनी है?
2 साल तक कैद, या जुर्माना, या दोनों।
IPC 499 vs BNS 356 में मुख्य बदलाव क्या है?
भाषा ज्यादा स्पष्ट हुई है, लेकिन सजा और exceptions लगभग वही हैं।
BNS 356 जमानती है या गैर-जमानती?
जमानती (bailable)।
BNS 356 में compounding हो सकती है?
हाँ, दोनों पक्ष राजी हों तो समझौता संभव है।
BNS 356 में सत्य का बचाव काम करता है?
हाँ, अगर बात सत्य है और सार्वजनिक हित में है तो अपराध नहीं माना जाएगा।
BNS 356 में सोशल मीडिया पोस्ट पर भी केस हो सकता है?
हाँ, अगर पोस्ट से किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर ठेस पहुँची हो।
BNS 356 में FIR कैसे दर्ज कराएँ?
मजिस्ट्रेट के पास private complaint दायर करनी पड़ती है।
BNS 356 में क्या politician के खिलाफ मानहानि केस चल सकता है?
हाँ, Rahul Gandhi case इसका उदाहरण है।
BNS 356 में क्या Freedom of Speech का बचाव मिलता है?
हाँ, genuine criticism और opinion को protection मिलता है।
BNS 356 में क्या जुर्माना कितना लग सकता है?
कोर्ट तय करता है, लाखों तक हो सकता है।
BNS 356 में क्या civil और criminal दोनों केस चल सकते हैं?
हाँ, civil defamation के लिए अलग सूट दायर किया जा सकता है।
BNS 356 के सबसे बड़े केस कौन से हैं?
Rahul Gandhi Modi Surname case, Subramanian Swamy case आदि।
BNS 356 में क्या truth का बचाव है?
हाँ, अगर बात सत्य है और public interest में है तो बचाव मिलता है।
BNS 356 में क्या journalist को protection मिलता है?
हाँ, अगर रिपोर्टिंग सत्य और public interest में हो।
BNS 356 में क्या online defamation पर केस हो सकता है?
हाँ, सोशल मीडिया, वेबसाइट या वीडियो पर भी लागू होता है।
BNS 356 में क्या compounding की प्रक्रिया क्या है?
दोनों पक्ष राजी हों तो मजिस्ट्रेट के सामने समझौता किया जा सकता है।
BNS 356 में क्या सजा कितने प्रतिशत मामलों में jail होती है?
ज्यादातर मामलों में जुर्माना या warning मिलती है, jail rare है।
BNS 356 में क्या IPC 499/500 से सजा में कोई फर्क है?
नहीं, सजा लगभग वही रखी गई है।
BNS 356 में क्या FIR कैसे फाइल करें?
मजिस्ट्रेट के पास private complaint दायर करनी पड़ती है।
Disclaimer
PenalCodeDetail.com is for educational and informational purposes only. The content does not constitute legal advice, opinion, or professional service. Always consult a qualified lawyer for your specific case, as laws change and vary by jurisdiction. Any reliance on this information is at your own risk. Last updated: 11 April 2026.
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