BNS Section 336 क्या है? जानबूझकर चोट पहुँचाना – गंभीर अपराध, सख्त सजा, जमानत और विस्तृत तुलना हिंदी में

BNS Section 336 भारतीय न्याय संहिता 2023 की एक महत्वपूर्ण धारा है जो जानबूझकर किसी को चोट पहुँचाने (Voluntarily Causing Hurt) को अपराध मानती है। यह धारा उन मामलों को कवर करती है जहाँ कोई व्यक्ति जानबूझकर दूसरे व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुँचाता है, भले ही चोट गंभीर न हो।

पुराने कानून में IPC 323 इस अपराध को दंडित करती थी। अब BNS Section 336 ने IPC 323 की जगह ले ली है। नया कानून पुराने से ज्यादा स्पष्ट, आधुनिक और सख्त है।

Table of Contents

IPC 323 vs BNS Section 336 की पूरी तुलना

विषय पुरानी IPC 323 नई BNS Section 336 क्या बदला?
अपराध का नाम Voluntarily causing hurt Voluntarily causing hurt नाम वही
परिभाषा जानबूझकर चोट पहुँचाना जानबूझकर चोट पहुँचाना भाषा ज्यादा स्पष्ट
सजा 1 साल तक कैद + जुर्माना 1 साल तक कैद + जुर्माना कोई बड़ा बदलाव नहीं
जमानत जमानती (bailable) जमानती (bailable) कोई बदलाव नहीं
FIR Non-cognizable Non-cognizable कोई बदलाव नहीं
ट्रायल मजिस्ट्रेट कोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट कोई बदलाव नहीं

BNS Section 336 की विस्तृत व्याख्या

धारा 336 BNS कहती है: कोई भी व्यक्ति जो जानबूझकर किसी दूसरे व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुँचाता है, वह इस धारा के तहत अपराधी माना जाएगा।

मुख्य तत्व (Ingredients):

  • जानबूझकर (voluntarily) कार्य करना
  • शारीरिक चोट पहुँचना
  • चोट गंभीर हो या साधारण

सजा: 1 साल तक कैद + जुर्माना

जमानत: जमानती (bailable) FIR: Non-cognizable (मजिस्ट्रेट के आदेश से दर्ज होती है) ट्रायल: मजिस्ट्रेट कोर्ट में

BNS 336 के रोज़मर्रा के उदाहरण

  1. घरेलू झगड़े में पति द्वारा पत्नी को मारपीट करना।
  2. पड़ोस में लड़ाई के दौरान हाथापाई और चोट पहुँचाना।
  3. सड़क पर गुस्से में किसी को थप्पड़ या घूँसा मारना।
  4. ऑफिस में同事 के साथ झगड़ा करके चोट करना।
  5. स्कूल या कॉलेज में छात्रों के बीच मारपीट।

अगर तुम पर BNS 336 लग गई हो तो क्या करोगे?

  1. तुरंत वकील से मिलो।
  2. आत्मरक्षा या provocation का बचाव तैयार करो।
  3. मेडिकल रिपोर्ट और गवाह इकट्ठा करो।
  4. जमानत आसानी से मिल सकती है क्योंकि यह जमानती अपराध है।
  5. समझौता (compounding) की कोशिश करो।

अगर तुम चोट का शिकार हो तो क्या करोगे?

  1. तुरंत अस्पताल जाकर MLC (Medico Legal Case) रिपोर्ट बनवाओ।
  2. मजिस्ट्रेट के पास private complaint दायर करो।
  3. सबूत (फोटो, गवाह, मेडिकल रिपोर्ट) सुरक्षित रखो।
  4. महिला आयोग या पुलिस हेल्पलाइन से मदद लो।

Conclusion

BNS Section 336 जानबूझकर चोट पहुँचाने पर सख्त कानून है। यह आम मारपीट और घरेलू हिंसा के मामलों में बहुत उपयोगी है। अगर आपके साथ ऐसा मामला है या आपके खिलाफ केस चल रहा है, तो तुरंत अनुभवी वकील से सलाह लें। penalcodedetail.com पर और धाराएँ पढ़ते रहो – हम तुम्हारे साथ हैं। 🙏

FAQ – सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल

BNS Section 336 क्या है?

जानबूझकर किसी को चोट पहुँचाने की धारा।

BNS 336 में सजा कितनी है?

1 साल तक कैद + जुर्माना।

IPC 323 vs BNS 336 में मुख्य बदलाव क्या है?

भाषा ज्यादा स्पष्ट हुई है, लेकिन सजा और प्रावधान लगभग वही हैं।

BNS 336 जमानती है या गैर-जमानती?

जमानती (bailable)।

BNS 336 में compounding हो सकती है?

हाँ, दोनों पक्ष राजी हों तो समझौता संभव है।

BNS 336 में FIR कैसे दर्ज कराएँ?

मजिस्ट्रेट के पास private complaint दायर करनी पड़ती है।

BNS 336 में क्या मेडिकल रिपोर्ट जरूरी है?

हाँ, चोट साबित करने के लिए MLC रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है।

BNS 336 में क्या आत्मरक्षा का बचाव काम करता है?

हाँ, अगर चोट बचाव में लगाई गई हो तो अपराध नहीं माना जाएगा।

BNS 336 में क्या घरेलू हिंसा के मामले आते हैं?

हाँ, पति द्वारा पत्नी को मारपीट करना BNS 336 के तहत आता है।

BNS 336 में क्या सजा कितने प्रतिशत मामलों में jail होती है?

ज्यादातर मामलों में जुर्माना या चेतावनी मिलती है, jail rare है।

BNS 336 में क्या 323 IPC की जगह अब क्या लिखा जाता है?

अब सिर्फ BNS 336 लिखा जाता है।

BNS 336 में क्या digital evidence मान्य है?

हाँ, CCTV, मोबाइल वीडियो आदि मान्य हैं।

BNS 336 में क्या civil case भी चल सकता है?

हाँ, मुआवजे के लिए सिविल सूट अलग से दायर किया जा सकता है।

BNS 336 में क्या compounding की प्रक्रिया क्या है?

दोनों पक्ष मजिस्ट्रेट के सामने समझौता कर सकते हैं।

BNS 336 में क्या SC/ST एक्ट के साथ लग सकती है?

हाँ, अगर पीड़ित SC/ST समुदाय से हो तो अतिरिक्त धाराएँ लगाई जा सकती हैं।

BNS 336 में क्या ट्रायल कितने समय में पूरा होता है?

मजिस्ट्रेट कोर्ट में 6 महीने से 2 साल तक लग सकता है।

BNS 336 में क्या सजा के साथ जुर्माना भी लगता है?

हाँ, कोर्ट जुर्माना भी लगा सकता है।

BNS 336 में क्या previous conviction का असर पड़ता है?

हाँ, पुराने केस होने पर सजा बढ़ सकती है।

BNS 336 में क्या महिलाओं को विशेष सुरक्षा मिलती है?

हाँ, घरेलू हिंसा के मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान लागू होते हैं।

BNS 336 में क्या अपील कहाँ की जा सकती है?

मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट और फिर हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है।

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