परिचय: BNS Section 317(2) – गर्भवती महिला का गर्भपात करवाना
गर्भावस्था एक महिला की सबसे संवेदनशील अवस्था होती है। जब कोई व्यक्ति जानबूझकर गर्भवती महिला का गर्भपात करवाता है, खासकर जब महिला “quick with child” (गर्भ में बच्चा हिलने लगा हो) की स्थिति में हो, तो यह बहुत गंभीर अपराध माना जाता है।
पुराने कानून में IPC 313 इस अपराध को दंडित करती थी। अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 में धारा 317(2) ने IPC 313 की जगह ले ली है। यह धारा विशेष रूप से उन मामलों में लागू होती है जहाँ गर्भपात “quick with child” (गर्भ में बच्चे की हलचल शुरू हो चुकी हो) की स्थिति में करवाया जाता है।
यह आर्टिकल BNS Section 317(2) की बहुत विस्तृत व्याख्या करता है – परिभाषा, सजा, पुरानी धारा से तुलना, उदाहरण, landmark judgements, दुरुपयोग, बचाव और व्यावहारिक सलाह के साथ।
BNS Section 317(2) की पूरी व्याख्या
धारा 317(2) BNS कहती है: “जो कोई व्यक्ति किसी महिला का गर्भपात करवाता है, और महिला quick with child (गर्भ में बच्चे की हलचल शुरू हो चुकी हो) की स्थिति में हो, तो वह इस उप-धारा के तहत अपराधी माना जाएगा।”
मुख्य तत्व (Ingredients):
- महिला का गर्भपात करवाना
- महिला quick with child की स्थिति में हो (usually 16-20 सप्ताह के बाद, जब बच्चे की हलचल महसूस होने लगती है)
- जानबूझकर या सहमति के बिना किया गया हो
सजा: 7 साल तक कैद + जुर्माना
जमानत: गैर-जमानती (Non-bailable) FIR: Cognizable
IPC 313 vs BNS Section 317(2) की विस्तृत तुलना
| विषय | पुरानी IPC 313 | नई BNS Section 317(2) | क्या बदला? |
|---|---|---|---|
| अपराध का नाम | Causing miscarriage without woman’s consent (quick with child) | Causing miscarriage without woman’s consent (quick with child) | नाम लगभग वही |
| परिभाषा | Quick with child में गर्भपात | Quick with child में गर्भपात | भाषा ज्यादा स्पष्ट |
| सजा | 7 साल तक कैद + जुर्माना | 7 साल तक कैद + जुर्माना | कोई बड़ा बदलाव नहीं |
| जमानत | गैर-जमानती | गैर-जमानती | कोई बदलाव नहीं |
| FIR | Cognizable | Cognizable | कोई बदलाव नहीं |
BNS 317(2) के रोज़मर्रा के उदाहरण
- पति या परिवार द्वारा गर्भवती महिला को जबरन गर्भपात करवाना जब गर्भ 5-6 महीने का हो।
- पूर्व प्रेमी द्वारा गर्भवती महिला को दबाव देकर या धमकी देकर गर्भपात करवाना।
- डॉक्टर द्वारा बिना सहमति या गलत तरीके से quick with child में गर्भपात करवाना।
- परिवार द्वारा लड़की के गर्भ में लड़का न होने पर जबरन गर्भपात करवाना।
- बलात्कार के बाद गर्भवती महिला को जबरन गर्भपात करवाने की कोशिश।
अगर तुम पर BNS 317(2) लग गई हो तो क्या करोगे?
- तुरंत senior criminal lawyer से मिलो।
- महिला की सहमति थी, यह साबित करो।
- जमानत के लिए सेशन कोर्ट → हाई कोर्ट।
- FIR quash के लिए हाई कोर्ट में याचिका डालो।
- अगर सहमति साबित हो जाए तो केस कमजोर हो जाता है।
अगर तुम्हारी बेटी/बहन का गर्भपात जबरन करवाया गया हो तो क्या करोगे?
- तुरंत थाने में FIR दर्ज करवाओ (BNS 317(2) + BNS 85 + अन्य धाराएँ)।
- मेडिकल रिपोर्ट, गवाह, अस्पताल रिकॉर्ड इकट्ठा करो।
- महिला आयोग और राज्य महिला आयोग से मदद लो।
- Victim compensation के लिए आवेदन करो।
Conclusion BNS Section 317(2) गर्भवती महिला की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण धारा है। यह quick with child की स्थिति में गर्भपात को गंभीर अपराध मानती है। अगर आपके साथ ऐसा मामला है, तो तुरंत अनुभवी वकील से सलाह लें। penalcodedetail.com पर और धाराएँ पढ़ते रहो – हम तुम्हारे साथ हैं। 🙏
FAQ – सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल (10 FAQs)
BNS Section 317(2) क्या है?
Quick with child (गर्भ में बच्चे की हलचल शुरू होने) की स्थिति में गर्भपात करवाने की धारा।
BNS 317(2) में सजा कितनी है?
7 साल तक कैद + जुर्माना।
IPC 313 vs BNS 317(2) में मुख्य बदलाव क्या है?
भाषा ज्यादा स्पष्ट हुई है, लेकिन सजा और प्रावधान लगभग वही हैं।
BNS 317(2) जमानती है या गैर-जमानती?
गैर-जमानती।
Quick with child का मतलब क्या है?
गर्भावस्था का वह चरण जब महिला को बच्चे की हलचल महसूस होने लगती है (आमतौर पर 16-20 सप्ताह)।
BNS 317(2) में महिला की सहमति का क्या महत्व है?
अगर महिला की सहमति है तो धारा नहीं लगती, लेकिन quick with child में सहमति भी सीमित है।
BNS 317(2) में compounding हो सकता है?
कुछ मामलों में कोर्ट की अनुमति से संभव है।
BNS 317(2) में FIR कैसे दर्ज होती है?
थाने में जाकर गर्भपात का सबूत (मेडिकल रिपोर्ट) दें।
BNS 317(2) में क्या 85 BNS (क्रूरता) के साथ लग सकती है?
हाँ, अगर दहेज या क्रूरता के साथ गर्भपात करवाया गया हो तो दोनों लग सकती हैं।
BNS 317(2) का दुरुपयोग कैसे होता है?
झूठी शिकायत करके निर्दोष डॉक्टर या परिवार को फँसाना।
Disclaimer PenalCodeDetail.com is for educational and informational purposes only. The content does not constitute legal advice, opinion, or professional service. Always consult a qualified lawyer for your specific case, as laws change and vary by jurisdiction. Any reliance on this information is at your own risk. Last updated: 09 May 2026.
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