परिचय: BNS Section 117(2) – खतरनाक हथियार से गंभीर चोट का सख्त कानून
जब कोई व्यक्ति चाकू, ब्लेड, एसिड, लोहे की रॉड, बंदूक या किसी खतरनाक हथियार का इस्तेमाल करके किसी को इतनी गंभीर चोट पहुँचाता है कि हड्डी टूट जाए, चेहरा स्थायी रूप से बिगड़ जाए, आँख की रोशनी चली जाए, कान सुनना बंद कर दे या जीवन खतरे में पड़ जाए, तो इसे कानूनी भाषा में Grievous Hurt by Dangerous Weapons कहा जाता है।
पुराने कानून में IPC 326 इस अपराध को दंडित करती थी। अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 में धारा 117(2) ने IPC 326 की जगह ले ली है। यह धारा खासकर एसिड अटैक, चाकूबाजी और खतरनाक हथियार से होने वाली गंभीर चोटों पर सख्ती बरतती है।
यह आर्टिकल BNS Section 117(2) की बहुत विस्तृत व्याख्या करता है – परिभाषा, सजा, पुरानी धारा से तुलना, उदाहरण, landmark judgements, दुरुपयोग, बचाव, व्यावहारिक सलाह और 10 सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब के साथ।
BNS Section 117(2) की पूरी व्याख्या
धारा 117(2) BNS कहती है: “जो कोई व्यक्ति जानबूझकर खतरनाक हथियार या साधन का इस्तेमाल करके किसी को गंभीर चोट (grievous hurt) पहुँचाता है, तो वह इस उप-धारा के तहत अपराधी माना जाएगा।”
मुख्य तत्व (Ingredients):
- जानबूझकर कार्य करना (voluntarily)
- खतरनाक हथियार या साधन (knife, acid, iron rod, firearm, explosive आदि) का इस्तेमाल
- गंभीर चोट (grievous hurt) पहुँचाना
गंभीर चोट के प्रकार (BNS में):
- हड्डी या दाँत टूटना
- चेहरा या शरीर का स्थायी विकृति
- आँख, कान या जोड़ का स्थायी नुकसान
- 20 दिन से ज्यादा दर्द या काम न कर पाना
- जीवन को खतरा पैदा करना
- गर्भपात करवाना
सजा: 10 साल तक कैद या आजीवन कारावास + जुर्माना
जमानत: गैर-जमानती (Non-bailable) FIR: Cognizable
IPC 326 vs BNS Section 117(2) की विस्तृत तुलना
| विषय | पुरानी IPC 326 | नई BNS Section 117(2) | क्या बदला? |
|---|---|---|---|
| अपराध का नाम | Voluntarily causing grievous hurt by dangerous weapons | Voluntarily causing grievous hurt by dangerous weapons | नाम लगभग वही |
| परिभाषा | खतरनाक हथियार से गंभीर चोट | खतरनाक हथियार से गंभीर चोट | भाषा ज्यादा स्पष्ट |
| सजा | 10 साल या आजीवन | 10 साल या आजीवन | कोई बड़ा बदलाव नहीं |
| जमानत | गैर-जमानती | गैर-जमानती | कोई बदलाव नहीं |
| FIR | Cognizable | Cognizable | कोई बदलाव नहीं |
| ट्रायल | सेशन कोर्ट | सेशन कोर्ट | कोई बदलाव नहीं |
BNS 117(2) के रोज़मर्रा के उदाहरण
- एसिड अटैक: पूर्व प्रेमी ने दहेज या रिश्ता न मानने पर एसिड फेंक दिया, चेहरा और शरीर जला दिया → BNS 117(2) + विशेष प्रावधान।
- चाकूबाजी: झगड़े में चाकू से पेट में वार किया, आंतों को नुकसान पहुँचा → BNS 117(2)।
- लोहे की रॉड: जमीन विवाद में लोहे की रॉड से सिर पर वार करके हड्डी तोड़ दी → BNS 117(2)।
- बंदूक: गुस्से में गोली मार दी, लेकिन मौत नहीं हुई, गंभीर चोट हुई → BNS 117(2)।
- पेट्रोल: किसी की दुकान पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी → BNS 117(2)।
अगर तुम पर BNS 117(2) लग गई हो तो क्या करोगे? (Step-by-Step)
- तुरंत senior criminal lawyer से मिलो।
- मेडिकल रिपोर्ट चैलेंज करो – चोट गंभीर नहीं साबित हुई तो बचाव मजबूत।
- आत्मरक्षा (Private Defence) का बचाव करो।
- जमानत के लिए सेशन कोर्ट → हाई कोर्ट।
- FIR quash के लिए हाई कोर्ट में 482 याचिका डालो।
अगर तुम्हारे साथ खतरनाक हथियार से चोट हुई हो तो क्या करोगे?
- तुरंत अस्पताल जाकर MLC रिपोर्ट बनवाओ।
- पुलिस में FIR दर्ज करवाओ (BNS 117(2) + अन्य धाराएँ)।
- मेडिकल रिपोर्ट, गवाह, CCTV, हथियार का सबूत इकट्ठा करो।
- मुआवजे के लिए कोर्ट में आवेदन करो।
- एसिड अटैक हो तो राज्य सरकार से विशेष मुआवजा माँगो।
Conclusion
BNS Section 117(2) खतरनाक हथियार या एसिड से गंभीर चोट पहुँचाने वाले अपराधों पर सख्त कानून है। यह धारा समाज में हिंसा को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर आपके साथ ऐसा हुआ है या आपके खिलाफ केस है, तो तुरंत मेडिकल रिपोर्ट और वकील की मदद लें। penalcodedetail.com पर और धाराएँ पढ़ते रहो – हम तुम्हारे साथ हैं। 🙏
FAQ – सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल (10 FAQs)
BNS Section 117(2) क्या है?
खतरनाक हथियार से गंभीर चोट पहुँचाने की धारा।
BNS 117(2) में सजा कितनी है?
10 साल तक कैद या आजीवन कारावास + जुर्माना।
IPC 326 vs BNS 117(2) में मुख्य बदलाव क्या है?
भाषा ज्यादा स्पष्ट हुई है, लेकिन सजा और प्रावधान लगभग वही हैं।
BNS 117(2) जमानती है या गैर-जमानती?
गैर-जमानती।
एसिड अटैक पर कौन सी धारा लगती है?
BNS 117(2) + BNS 326 (पुरानी 326) + विशेष प्रावधान।
BNS 117(2) में compounding हो सकता है?
गंभीर मामलों में मुश्किल, लेकिन कोर्ट कुछ मामलों में विचार कर सकता है।
BNS 117(2) में FIR कैसे दर्ज होती है?
पुलिस सीधे cognizable FIR दर्ज कर सकती है।
BNS 117(2) में जमानत मिलने में कितना समय लगता है?
15-60 दिन तक (कोर्ट पर निर्भर)।
BNS 117(2) में क्या 34 या 149 के साथ लग सकती है?
हाँ, अगर कई लोग मिलकर चोट पहुँचाई हो तो लगाई जा सकती है।
BNS 117(2) का दुरुपयोग कैसे होता है?
छोटे झगड़े को भी dangerous weapon से चोट बताकर झूठी FIR दर्ज करवाना।
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