परिचय: दहेज मौत – एक ऐसी समस्या जो समाज को अंदर से खोखला कर रही है
दहेज की माँग आज भी भारतीय समाज में एक बड़ी बुराई बनी हुई है। शादी के बाद पत्नी पर दहेज के लिए लगातार शारीरिक और मानसिक क्रूरता की जाती है। कई बार यह क्रूरता इतनी बढ़ जाती है कि महिला की मौत हो जाती है। इसे दहेज मौत (Dowry Death) कहा जाता है।
पुराने कानून IPC 304B ने इस अपराध को विशेष रूप से परिभाषित किया था और पति तथा उसके रिश्तेदारों पर presumption of guilt (दोष का अनुमान) का प्रावधान रखा था। अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 में धारा 80 ने IPC 304B की जगह ले ली है।
यह आर्टिकल IPC 304B vs BNS Section 80 की विस्तृत और गहन तुलना करता है – परिभाषा, सजा, presumption, जमानत, उदाहरण, landmark judgements, दुरुपयोग, बचाव और व्यावहारिक सलाह के साथ।

IPC 304B vs BNS Section 80 की विस्तृत तुलना
| विषय | पुरानी IPC 304B | नई BNS Section 80 | क्या बदला? |
|---|---|---|---|
| अपराध का नाम | Dowry Death | Dowry Death | नाम वही |
| परिभाषा | शादी के 7 साल के अंदर असामान्य मौत + दहेज क्रूरता | शादी के 7 साल के अंदर असामान्य मौत + दहेज क्रूरता | भाषा थोड़ी स्पष्ट हुई |
| सजा | न्यूनतम 7 साल, अधिकतम आजीवन कारावास | न्यूनतम 7 साल, अधिकतम आजीवन कारावास | कोई बदलाव नहीं |
| जमानत | गैर-जमानती | गैर-जमानती | कोई बदलाव नहीं |
| Presumption | Indian Evidence Act 113B के तहत | Bharatiya Sakshya Adhiniyam के तहत | Evidence law बदला |
| ट्रायल | सेशन कोर्ट | सेशन कोर्ट | कोई बदलाव नहीं |
| समझौता | गैर-समझौता योग्य | गैर-समझौता योग्य | कोई बदलाव नहीं |
| FIR | Cognizable | Cognizable | कोई बदलाव नहीं |
धारा 80 BNS की पूरी व्याख्या (सरल भाषा में)
धारा 80 BNS तब लागू होती है जब:
- महिला की शादी के 7 साल के अंदर मौत हुई हो
- मौत असामान्य परिस्थितियों में हुई हो (जैसे जलना, फाँसी लगाना, विष देना, चोट आदि)
- मौत से जल्द पहले (soon before her death) पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा दहेज की माँग से क्रूरता या उत्पीड़न किया गया हो
सजा: कम से कम 7 साल की कैद, जो आजीवन कारावास तक हो सकती है।
Presumption का प्रावधान: अदालत यह मान लेगी कि पति और उसके रिश्तेदार ही मौत के लिए जिम्मेदार हैं, जब तक वे खुद को निर्दोष साबित नहीं कर देते। यह presumption पीड़ित परिवार के लिए बहुत मजबूत हथियार है।

दहेज मौत के वास्तविक उदाहरण
- शादी के 3 साल बाद दहेज की माँग पूरी न होने पर पत्नी को आग लगा दी गई।
- शादी के 5 साल में लगातार मारपीट और मानसिक त्रास के बाद पत्नी ने आत्महत्या कर ली।
- शादी के 8 साल बाद मौत हुई → BNS 80 नहीं लगेगा।
- केवल दहेज माँग थी लेकिन मौत हार्ट अटैक से हुई → BNS 80 नहीं लगेगा।
अगर तुम पर IPC 304B / BNS 80 लग गई हो तो क्या करोगे? (Step-by-Step)
- तुरंत दहेज विशेषज्ञ senior criminal lawyer से मिलो।
- “Soon before death” cruelty का कोई ठोस प्रमाण न हो तो बचाव बहुत मजबूत हो सकता है।
- बैंक स्टेटमेंट, फोन रिकॉर्ड, गवाह, मेडिकल रिपोर्ट, मैसेज इकट्ठा करो।
- जमानत के लिए सेशन कोर्ट → हाई कोर्ट में प्रयास करो।
- 498A (BNS 85) भी साथ लगती है, दोनों केस को साथ हैंडल करो।
अगर तुम्हारी बेटी/बहन दहेज मौत का शिकार हुई हो तो क्या करोगे?
- तुरंत थाने में FIR दर्ज करवाओ (BNS 80 + BNS 85 + BNS 103 अगर लागू हो)।
- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, hospital records, गवाह, मैसेज, फोन कॉल्स सुरक्षित रखो।
- “Soon before death” cruelty साबित करने के लिए मजबूत सबूत दो।
- महिला आयोग, राज्य दहेज निषेध अधिकारी और NCW से मदद लो।
- Victim compensation और मुआवजे के लिए आवेदन करो।

Conclusion
IPC 304B अब BNS Section 80 बन गई है। दहेज मौत एक गंभीर सामाजिक समस्या है और कानून इसे बहुत सख्ती से देखता है। न्यूनतम 7 साल की सजा और presumption का प्रावधान पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में मदद करता है।
FAQ – सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल
IPC 304B अब क्या हो गई?
अब BNS की धारा 80 हो गई है।
धारा 80 BNS में सजा कितनी है?
न्यूनतम 7 साल से आजीवन कारावास तक।
IPC 304B vs BNS 80 में मुख्य बदलाव क्या है?
केवल section number बदला है, सजा और presumption लगभग वही हैं।
धारा 80 BNS जमानती है या गैर-जमानती?
पूरी तरह गैर-जमानती।
दहेज मौत में presumption क्या है?
अदालत पति और रिश्तेदारों को दोषी मान लेगी जब तक वे खुद को निर्दोष साबित न करें।
7 साल बाद मौत हुई तो क्या?
BNS 80 नहीं लगेगा।
धारा 80 BNS में compounding हो सकती है?
नहीं, गैर-समझौता योग्य अपराध है।
धारा 80 BNS में FIR कैसे दर्ज कराएँ?
थाने में जाएँ और सबूत दें।
304B और 80 में सजा में कोई फर्क है?
नहीं, दोनों में न्यूनतम 7 साल से आजीवन।
धारा 80 BNS में क्या 85 BNS (498A) के साथ लगती है?
हाँ, ज्यादातर मामलों में दोनों साथ लगाई जाती हैं।
अगर आपके परिवार में ऐसा मामला है या आप पर केस चल रहा है, तो तुरंत अनुभवी वकील से सलाह लें। समय पर सही कदम उठाना बहुत महत्वपूर्ण है।
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