परिचय: BNS Section 191(2) – अदालत में झूठी गवाही का सख्त कानून
अदालत न्याय की अंतिम जगह होती है। अगर कोई व्यक्ति अदालत में जानबूझकर झूठी गवाही देता है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे न्याय व्यवस्था के खिलाफ अपराध है। पुराने कानून में IPC 193 इस अपराध को दंडित करती थी। अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 में धारा 191(2) ने IPC 193 की जगह ले ली है।
यह धारा उन लोगों को सख्त सजा देती है जो अदालत में झूठी गवाही देकर निर्दोष को सजा दिलवाने या दोषी को बचाने की कोशिश करते हैं।
यह आर्टिकल BNS Section 191(2) की बहुत विस्तृत व्याख्या करता है – परिभाषा, सजा, पुरानी धारा से तुलना, उदाहरण, केस, दुरुपयोग, बचाव और व्यावहारिक सलाह के साथ।
BNS Section 191(2) की पूरी व्याख्या
धारा 191(2) BNS कहती है: “जो कोई व्यक्ति कानूनी रूप से बाध्य होने पर किसी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष जानबूझकर झूठी गवाही देता है, तो वह इस धारा के तहत अपराधी माना जाएगा।”
मुख्य तत्व (Ingredients):
- कानूनी रूप से बाध्य होना (oath लेना या affirmation)
- जानबूझकर (intentionally) झूठ बोलना
- न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष गवाही देना
सजा: 7 साल तक कैद + जुर्माना
जमानत: गैर-जमानती (Non-bailable) FIR: Cognizable
IPC 193 vs BNS Section 191(2) की विस्तृत तुलना
| विषय | पुरानी IPC 193 | नई BNS Section 191(2) | क्या बदला? |
|---|---|---|---|
| अपराध का नाम | False evidence | False evidence | नाम वही |
| परिभाषा | जानबूझकर झूठी गवाही | जानबूझकर झूठी गवाही | भाषा ज्यादा स्पष्ट |
| सजा | 7 साल तक कैद + जुर्माना | 7 साल तक कैद + जुर्माना | कोई बदलाव नहीं |
| जमानत | गैर-जमानती | गैर-जमानती | कोई बदलाव नहीं |
| FIR | Cognizable | Cognizable | कोई बदलाव नहीं |
BNS 191(2) के रोज़मर्रा के उदाहरण
- अदालत में झूठी गवाही देकर निर्दोष व्यक्ति को फँसाना।
- मुकदमे में जानबूझकर गलत तथ्य बताना।
- गवाह बनकर झूठ बोलना ताकि दोस्त बच जाए।
- तलाक के केस में झूठी गवाही देकर संपत्ति हड़पने की कोशिश।
- क्रिमिनल केस में पुलिस या कोर्ट में झूठा बयान देना।
अगर तुम पर BNS 191(2) लग गई हो तो क्या करोगे?
- तुरंत senior criminal lawyer से मिलो।
- गवाही झूठी नहीं थी, यह साबित करो।
- जमानत के लिए सेशन कोर्ट → हाई कोर्ट।
- FIR quash के लिए हाई कोर्ट में 482 याचिका डालो।
अगर तुम्हें झूठी गवाही से नुकसान हुआ हो तो क्या करोगे?
- तुरंत पुलिस में FIR दर्ज करवाओ (BNS 191(2))।
- सबूत इकट्ठा करो (पुरानी गवाही, दस्तावेज, गवाह)।
- कोर्ट में perjury का केस चलाओ।
- मुआवजे के लिए आवेदन करो।
Conclusion BNS Section 191(2) न्याय व्यवस्था की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण धारा है। झूठी गवाही पूरे न्याय तंत्र को कमजोर करती है। कानून इसे बहुत सख्ती से देखता है। अगर आपके साथ ऐसा मामला है, तो तुरंत अनुभवी वकील से सलाह लें। penalcodedetail.com पर और धाराएँ पढ़ते रहो – हम तुम्हारे साथ हैं। 🙏
FAQ – सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल (10 FAQs)
BNS Section 191(2) क्या है?
अदालत या प्राधिकारी के समक्ष जानबूझकर झूठी गवाही देने की धारा।
BNS 191(2) में सजा कितनी है?
7 साल तक कैद + जुर्माना।
IPC 193 vs BNS 191(2) में मुख्य बदलाव क्या है?
भाषा ज्यादा स्पष्ट हुई है, लेकिन सजा और प्रावधान लगभग वही हैं।
BNS 191(2) जमानती है या गैर-जमानती?
गैर-जमानती।
BNS 191(2) में क्या compounding हो सकता है?
नहीं, गैर-समझौता योग्य अपराध है।
BNS 191(2) में FIR कैसे दर्ज होती है?
पुलिस सीधे cognizable FIR दर्ज कर सकती है।
BNS 191(2) का दुरुपयोग कैसे होता है?
झूठी गवाही देकर निर्दोष को फँसाना या दोषी को बचाना।
BNS 191(2) में जमानत मिलना कितना मुश्किल है?
गैर-जमानती होने के कारण बहुत मुश्किल।
BNS 191(2) में क्या digital evidence मान्य है?
हाँ, रिकॉर्डिंग, वीडियो, चैट आदि सबूत के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
BNS 191(2) में बचाव क्या हो सकता है?
गवाही गलती से हुई थी, जानबूझकर नहीं, या सच्ची थी।
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