परिचय: सड़क पर लापरवाही की भारी कीमत – धारा 106 BNS
सड़क दुर्घटनाएँ भारत में रोजाना की घटना बन गई हैं। हर साल लाखों लोग रैश ड्राइविंग या लापरवाही के कारण अपनी जान गँवाते हैं। कई बार ड्राइवर दुर्घटना के बाद घायल को छोड़कर भाग जाता है – इसे ही हिट एंड रन कहते हैं।
पुराने कानून IPC 304A में ऐसी लापरवाही पर सिर्फ 2 साल की सजा थी, जो बहुत कम लगती थी। अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) में धारा 106 ने इसे बदल दिया है। यह धारा दो हिस्सों में बँटी है – अगर ड्राइवर दुर्घटना की रिपोर्ट करता है तो सजा कम, लेकिन अगर भाग जाता है तो सजा दोगुनी से ज्यादा कड़ी।
यह आर्टिकल धारा 106 BNS को आसान हिंदी में विस्तार से समझाएगा – परिभाषा, सजा, जमानत, उदाहरण, केस, बचाव और व्यावहारिक सलाह के साथ। अगर आप ड्राइवर हैं, पीड़ित परिवार से हैं या कानूनी जानकारी चाहते हैं, तो यह लेख आपके काम आएगा।
धारा 106 BNS क्या है? (सरल भाषा में समझें)
धारा 106 BNS लापरवाही या रैश ड्राइविंग से किसी की मौत होने पर लगती है, जब वह मौत culpable homicide (जानबूझकर हत्या जैसी) न हो।
यह दो उप-धाराओं में बँटी है:
- धारा 106(1) BNS: रैश या नेग्लिजेंट ड्राइविंग से मौत हो जाए, लेकिन ड्राइवर तुरंत पुलिस या मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट कर दे। सजा: 5 साल तक कैद + जुर्माना (या दोनों)।
- धारा 106(2) BNS (हिट एंड रन मुख्य धारा): मौत होने के बाद ड्राइवर भाग जाए और तुरंत रिपोर्ट न करे। सजा: 10 साल तक कैद + जुर्माना।
मुख्य उद्देश्य: ड्राइवर को जिम्मेदार बनाना। अगर आप दुर्घटना के बाद रुककर मदद करते हैं और रिपोर्ट करते हैं, तो कानून आपको कुछ राहत देता है। लेकिन भागने पर सजा बहुत कड़ी।
पुरानी IPC से तुलना:
- IPC 304A → सिर्फ 2 साल कैद (बेल आसान)
- BNS 106(1) → 5 साल कैद
- BNS 106(2) → 10 साल कैद + गैर-जमानती
धारा 106 BNS vs IPC 304A की पूरी तुलना
| विषय | पुरानी IPC 304A | BNS 106(1) (रिपोर्ट करने पर) | BNS 106(2) (हिट एंड रन) |
|---|---|---|---|
| अपराध | रैश/नेग्लिजेंट एक्ट से मौत | रैश/नेग्लिजेंट ड्राइविंग से मौत | मौत के बाद भागना और रिपोर्ट न करना |
| सजा | 2 साल कैद + जुर्माना | 5 साल कैद + जुर्माना | 10 साल कैद + जुर्माना |
| जमानत | जमानती (bailable) | जमानती (bailable) | गैर-जमानती (non-bailable) |
| FIR | Cognizable | Cognizable | Cognizable |
| ट्रायल | मजिस्ट्रेट कोर्ट | मजिस्ट्रेट कोर्ट | मजिस्ट्रेट कोर्ट |
| रिपोर्टिंग का प्रभाव | कोई विशेष प्रावधान नहीं | सजा कम | सजा बढ़ जाती है |
नोट: धारा 106(2) को शुरू में कुछ विवाद के कारण लागू करने में देरी हुई थी, लेकिन 2026 तक यह पूरी तरह लागू माना जाता है।
हिट एंड रन के रोज़मर्रा के उदाहरण
- रात की ड्राइविंग: तेज रफ्तार में बाइक सवार को टक्कर मारकर ड्राइवर भाग जाता है → 106(2) BNS।
- ट्रक ड्राइवर: ट्रक से पैदल यात्री को कुचलकर भाग जाता है और पुलिस को नहीं बताता → 10 साल तक सजा।
- कार एक्सीडेंट: कार से किसी को टक्कर मारकर घायल छोड़कर भागना → अगर मौत हो जाए तो 106(2)।
- रिपोर्ट करने वाला ड्राइवर: दुर्घटना के बाद रुककर घायल को अस्पताल ले जाता है और पुलिस को बताता है → 106(1) में 5 साल तक सजा (कम संभावना)।
- मेडिकल नेग्लिजेंस: डॉक्टर की लापरवाही से मरीज की मौत (विशेष प्रावधान) → 2 साल तक।
अगर आप पर धारा 106 BNS लग गई हो तो क्या करें?
- तुरंत वकील से संपर्क करें – ट्रैफिक/क्रिमिनल स्पेशलिस्ट।
- सभी सबूत इकट्ठा करें: डैशकैम फुटेज, गवाह, कॉल रिकॉर्डिंग, अस्पताल रिपोर्ट।
- रिपोर्टिंग साबित करें: अगर आपने रिपोर्ट की थी तो मैसेज, कॉल लॉग या पुलिस स्टेशन रिकॉर्ड दिखाएँ।
- जमानत के लिए आवेदन: 106(1) में आसानी से मिल सकती है, 106(2) में सेशन/हाई कोर्ट जाना पड़ सकता है।
- 106(2) से बचाव: साबित करें कि आपने “soon after” रिपोर्ट करने की कोशिश की या परिस्थिति ऐसी थी कि रिपोर्ट नहीं कर सके।
अगर आपके परिवार का सदस्य हिट एंड रन का शिकार हुआ हो तो क्या करें?
- तुरंत FIR दर्ज करवाएँ – थाने में जाएँ या ऑनलाइन।
- सबूत इकट्ठा करें: CCTV, गवाह, मोबाइल लोकेशन, वाहन नंबर।
- पोस्टमॉर्टम और MLC रिपोर्ट जरूर करवाएँ।
- 106(2) BNS लगवाने की माँग करें अगर ड्राइवर भागा हो।
- मुआवजा: मोटर व्हीकल एक्ट के तहत इंश्योरेंस और कोर्ट से मुआवजा माँगें।
Conclusion धारा 106 BNS सड़क सुरक्षा को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण धारा है। यह ड्राइवरों को जिम्मेदार बनाती है – मदद करो और रिपोर्ट करो तो सजा कम, भागो तो सजा कड़ी। अगर दुर्घटना हुई है या केस चल रहा है, तो तुरंत वकील से सलाह लें। सबूत समय पर इकट्ठा करना बहुत जरूरी है। penalcodedetail.com पर और धाराएँ पढ़ते रहो – हम तुम्हारे साथ हैं। 🙏
FAQ – सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल
धारा 106 BNS क्या है?
रैश या नेग्लिजेंट ड्राइविंग से मौत होने पर लगने वाली धारा, जिसमें हिट एंड रन पर विशेष प्रावधान है।
धारा 106(2) BNS में सजा कितनी है?
10 साल तक कैद + जुर्माना (हिट एंड रन के लिए)।
धारा 106 BNS जमानती है या गैर-जमानती?
106(1) जमानती, 106(2) गैर-जमानती।
पुरानी IPC 304A से क्या फर्क है?
IPC में सिर्फ 2 साल सजा थी, BNS में 5 या 10 साल + हिट एंड रन पर अलग सजा।
हिट एंड रन में रिपोर्ट करने से क्या फायदा?
सजा 10 साल से घटकर 5 साल हो जाती है।
धारा 106 BNS में compounding हो सकती है?
आमतौर पर नहीं, लेकिन कोर्ट कुछ मामलों में विचार कर सकता है।
डॉक्टर की लापरवाही पर क्या सजा?
विशेष प्रावधान के तहत 2 साल तक कैद।
धारा 106 BNS में FIR कैसे दर्ज कराएँ?
थाने में जाएँ, वाहन नंबर और गवाह दें।
106(2) BNS में जमानत मिलना मुश्किल क्यों?
क्योंकि ड्राइवर की जिम्मेदारी से भागना गंभीर अपराध माना गया है।
धारा 106 BNS में क्या मोटर व्हीकल एक्ट की धाराएँ भी लगती हैं?
हाँ, अक्सर 279, 337, 338 MV Act के साथ लगाई जाती हैं।
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