धारा 109 BNS वो धारा है जो किसी को अपराध करने के लिए उकसाने (abetment by instigation) पर लगती है।
सरल भाषा में
- अगर कोई व्यक्ति दूसरे को कहे, लिखे, इशारा करे या ऐसा कुछ करे जिससे सामने वाला व्यक्ति कोई अपराध करने के लिए तैयार हो जाए → तो उकसाने वाला भी उतनी ही सजा पाता है जितनी मुख्य अपराधी को मिलती है।
उदाहरण से समझो
- कोई व्यक्ति दूसरे को कहता है “जा उसकी हत्या कर दे, मैं सब संभाल लूँगा” → सामने वाला हत्या कर देता है → उकसाने वाले पर भी धारा 302 (हत्या) के साथ धारा 109 BNS लगेगी → आजीवन या फाँसी तक सजा हो सकती है।
- किसी को कहना “उसकी दुकान में आग लगा दे” → आग लग जाती है → उकसाने वाले पर भी धारा 436 (आगजनी) + 109 BNS।
सजा
- उकसाए गए अपराध के बराबर सजा
- अगर मुख्य अपराध में आजीवन या फाँसी है → उकसाने वाले को भी वही सजा
- अगर मुख्य अपराध में 10 साल से कम सजा है → उकसाने वाले को भी वही सजा
जमानत → मुख्य अपराध जितनी जमानत (ज्यादातर गैर-जमानती) ट्रायल → मुख्य अपराध के साथ ही सेशन कोर्ट में
पुरानी IPC में → ये धारा 107 + 109 IPC थी (अब BNS में एक ही धारा 109 में आ गई है)
धारा 109 BNS कब लगती है? (रोज़मर्रा के 10 उदाहरण)
- हत्या के लिए उकसाना “उसको मार डालो, मैं गवाह नहीं बनूँगा” कहकर हत्या करवा दी → धारा 109 + 302 BNS।
- बलात्कार के लिए उकसाना “उस लड़की को पकड़ लो, मैं सब संभाल लूँगा” → बलात्कार हो गया → धारा 109 + 64/65 BNS।
- चोरी के लिए उकसाना “रात में घर में घुसकर सामान चुरा लो” → चोरी हो गई → धारा 109 + 303 BNS।
- दुकान में आग लगाने के लिए उकसाना “उसकी दुकान जला दो” → आग लग गई → धारा 109 + 436 BNS।
- झूठी गवाही के लिए उकसाना “कोर्ट में झूठ बोल दो” → झूठी गवाही दी → धारा 109 + 227 BNS।
- फर्जी दस्तावेज़ बनाने के लिए उकसाना “फर्जी वसीयत बना दो” → फर्जी वसीयत बन गई → धारा 109 + 336 BNS।
- मारपीट के लिए उकसाना “उसे पीट दो” → मारपीट हुई → धारा 109 + 115/117 BNS।
- धमकी देने के लिए उकसाना “उसको धमकी दे दो” → धमकी दी गई → धारा 109 + 351 BNS।
- सोशल मीडिया पर उकसावा “उसके घर में आग लगा दो” ट्वीट किया → किसी ने आग लगाई → धारा 109 + 436 BNS।
- पुलिस को गुमराह करने के लिए उकसाना “पुलिस को झूठी सूचना दे दो” → झूठी सूचना दी → धारा 109 + 228 BNS।
ध्यान रखो → उकसावा जानबूझकर होना चाहिए। सिर्फ सलाह या मजाक पर धारा नहीं लगती।
सजा की पूरी डिटेल
| उकसाया गया अपराध | मुख्य धारा (BNS) | उकसाने वाले की अधिकतम सजा | जमानत मिलती है? | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| हत्या | 103 | आजीवन या फाँसी | नहीं | “मार डालो” कहकर हत्या करवाई |
| बलात्कार | 64/65 | आजीवन या 10-20 साल | नहीं | “पकड़ लो” कहकर बलात्कार करवाया |
| चोरी | 303 | 7 साल तक | नहीं | “चुरा लो” कहकर चोरी करवाई |
| आगजनी | 436 | आजीवन या 10 साल | नहीं | “जला दो” कहकर आग लगवाई |
| गंभीर चोट | 115(2) | 10 साल तक | नहीं | “मारो” कहकर गंभीर चोट करवाई |
| धमकी | 351 | 2 साल तक | हाँ | “धमकी दे दो” कहकर धमकी दिलवाई |
जुर्माना → मुख्य अपराध जितना ही। कैद → मुख्य अपराध जितनी ही (कठोर या साधारण)।
जमानत मिलना मुश्किल क्यों?
- गैर-जमानती अपराध (अगर मुख्य अपराध गैर-जमानती है)
- उकसावा अपराध का कारण बनता है → उकसाने वाला भी मुख्य अपराधी जितना दोषी माना जाता है
- अगर मुख्य अपराध में आजीवन या फाँसी है → जमानत लगभग नामुमकिन
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उकसावे के केस में जमानत रेयर केस में ही मिलनी चाहिए
असल जिंदगी में धारा 109 BNS (पुरानी 109 IPC) के केस
- हत्या के लिए उकसावा → “उसको मार डालो” कहकर हत्या करवाई → 109 + 302
- बलात्कार के लिए उकसावा → “पकड़ लो” कहकर बलात्कार करवाया → 109 + 64/65
- चोरी के लिए उकसावा → “चुरा लो” कहकर चोरी करवाई → 109 + 303
- आगजनी के लिए उकसावा → “जला दो” कहकर आग लगवाई → 109 + 436
- झूठी गवाही के लिए उकसावा → “झूठ बोल दो” कहकर झूठी गवाही दी → 109 + 227
धारा 351(2) BNS का दुरुपयोग कैसे होता है?
- छोटी बहस में “हरामी” कहकर 351(2) लगा देना
- सोशल मीडिया पर पुरानी रंजिश में गंदा कमेंट करके FIR करवाना
- कोर्ट में ज्यादातर केस गवाह और सबूत के बिना कमजोर हो जाते हैं
- सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा – अपमान + उकसावे की संभावना साबित होनी चाहिए, वरना केस खारिज।
अगर तुम पर धारा 109 BNS लग गई हो तो क्या करोगे? (स्टेप-बाय-स्टेप)
- तुरंत अच्छा क्रिमिनल वकील लो
- उकसावे के सबूत मंगवाओ (मैसेज, कॉल रिकॉर्डिंग, गवाह)
- ये साबित करो कि उकसावा नहीं था या अपराध का इरादा नहीं था
- जमानत के लिए सेशन कोर्ट में आवेदन दो
- अगर सेशन कोर्ट मना करे तो हाई कोर्ट जाओ
- 482 CrPC में याचिका डालकर FIR रद्द करवाने की कोशिश करो
अगर किसी ने तुम्हें अपराध के लिए उकसाया हो तो क्या करोगे?
- सबूत इकट्ठा करो (ऑडियो, वीडियो, मैसेज, गवाह)
- थाने में शिकायत करो (109 BNS + मुख्य अपराध की धारा मंगवाओ)
- अगर पुलिस न माने तो मजिस्ट्रेट के पास शिकायत
- मुआवजे के लिए सिविल कोर्ट में भी केस कर सकते हो
Conclusion
धारा 109 BNS अपराध के लिए उकसाने की बहुत गंभीर धारा है – सजा मुख्य अपराध जितनी ही होती है (आजीवन तक भी जा सकती है)। अगर किसी ने तुम्हें अपराध के लिए उकसाया है या तुम पर लग गई है, तो तुरंत सबूत इकट्ठा करो और वकील से मिलो। penalcodedetail.com पर और धाराएँ पढ़ते रहो – हम तुम्हारे साथ हैं। 🙏
FAQ – सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल (20 जवाब)
धारा 109 BNS क्या है?
अपराध के लिए उकसाने की धारा है।
धारा 109 BNS में कितनी सजा मिलती है?
उकसाए गए अपराध जितनी सजा (आजीवन से लेकर 7 साल तक)।
धारा 109 BNS जमानती है या गैर-जमानती?
मुख्य अपराध जितनी जमानत (ज्यादातर गैर-जमानती)।
धारा 109 और 110 BNS में क्या फर्क है?
109 उकसाना (instigation), 110 सहायता या उकसावा (abetment by aid)।
हत्या के लिए उकसाने पर धारा 109 लगती है?
हाँ, 109 + 103 BNS (हत्या)।
धारा 109 BNS में compounding हो सकती है?
नहीं, मुख्य अपराध जितनी compounding (ज्यादातर नहीं)।
धारा 109 BNS में जमानत मिल सकती है?
मुख्य अपराध जितनी जमानत – बहुत मुश्किल।
धारा 109 BNS में FIR कैसे फाइल करें?
थाने में या online, उकसावे के सबूत दें।
धारा 109 BNS में कितने साल की सजा मिलती है?
मुख्य अपराध जितनी – आजीवन से लेकर 7 साल तक।
धारा 109 BNS में जुर्माना कितना लगता है?
कोर्ट तय करता है – मुख्य अपराध जितना।
धारा 109 BNS का दुरुपयोग कैसे रोकें?
उकसावे के सबूत और इरादा साबित करना जरूरी।
धारा 109 BNS में ट्रायल कितने समय में होता है?
सेशन कोर्ट में 2–5 साल तक लग सकता है।
धारा 109 और 351 BNS में क्या फर्क है?
109 अपराध उकसाना, 351 अपमान से शांति भंग।
धारा 109 BNS में क्या बचाव संभव है?
हाँ, अगर उकसावा नहीं था या अपराध का इरादा नहीं था।
धारा 109 BNS में क्या उकसावा साबित करना जरूरी है?
हाँ, जानबूझकर उकसावा साबित होना चाहिए।
धारा 109 BNS के सबसे बड़े केस कौन से हैं?
हत्या, बलात्कार, आगजनी के लिए उकसावे के केस।
धारा 109 BNS में क्या FIR में मुख्य धारा भी मंगवानी चाहिए?
हाँ, उकसावे के साथ मुख्य अपराध की धारा भी लगाओ।
धारा 109 BNS में क्या POCSO के साथ लगती है?
हाँ, अगर अपराध बलात्कार हो तो POCSO के साथ लगती है।
धारा 109 BNS में क्या सजा कितने प्रतिशत मामलों में jail होती है?
ज्यादातर मामलों में jail होती है क्योंकि उकसावा गंभीर अपराध है। conviction rate ~50-60% रहता है।
धारा 109 BNS में क्या अपराध पूरा न होने पर भी लगती है?
हाँ, उकसावा साबित हो तो अपराध पूरा न होने पर भी लगती है।
Disclaimer
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