धारा 351(2) BNS वो धारा है जो जानबूझकर किसी का अपमान करने पर लगती है – लेकिन अपमान ऐसा होना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति इतना गुस्सा हो जाए कि शांति भंग हो जाए या कोई अपराध कर बैठे।
उदाहरण से समझो
- कोई व्यक्ति सामने वाले को “हरामी, कमीना, तेरी बहन…” कहकर अपमान करता है → सामने वाला गुस्से में आकर मारपीट शुरू कर देता है → धारा 351(2) BNS लगती है।
- सोशल मीडिया पर किसी की जाति या परिवार पर गंदा कमेंट → सामने वाला उकसावे में आकर धमकी दे या झगड़ा करे → धारा 351(2) लगती है।
सजा
- अधिकतम 2 साल की कैद (साधारण या कठोर)
- या जुर्माना
- या दोनों
जमानत → हाँ मिलती है (जमानती अपराध) FIR → पुलिस सीधे दर्ज कर सकती है (शिकायत पर कार्रवाई होती है) ट्रायल → किसी भी मजिस्ट्रेट के पास
पुरानी IPC में → ये धारा 504 IPC थी (अब BNS में 351(2) हो गई है)
धारा 351(2) BNS कब लगती है? (रोज़मर्रा के 10 उदाहरण)
- पड़ोस में गाली-गलौज पड़ोसी ने “हरामी, कमीना, तेरी माँ…” कहकर अपमान किया → सामने वाला गुस्से में आकर हाथापाई शुरू → धारा 351(2) लगी।
- फेसबुक/व्हाट्सएप पर जातिसूचक कमेंट “चमार, भंगी, तेरे जैसे…” लिखा → सामने वाला उकसावे में आकर धमकी दी → धारा 351(2) + SC/ST एक्ट।
- ऑफिस में बॉस का अपमान बॉस ने कर्मचारी को “नालायक, कमीना” कहा → कर्मचारी गुस्से में आकर झगड़ा किया → धारा 351(2)।
- सार्वजनिक जगह पर महिला का अपमान किसी ने “बेशर्म औरत, कमीनी” कहकर अपमान किया → महिला उकसावे में आकर चिल्लाई → धारा 351(2)।
- पार्टी में शराब के नशे में अपमान किसी ने दूसरे को “कायर, नामर्द” कहकर अपमान किया → सामने वाला गुस्से में आकर मारपीट शुरू → धारा 351(2)।
- स्कूल/कॉलेज में छात्र-छात्रा का अपमान किसी ने “कमीनी, चरित्रहीन” कहा → सामने वाला उकसावे में आकर झगड़ा → धारा 351(2)।
- परिवार में बहू-बेटे का अपमान सास ने बहू को “हरामज़ादी, कमीनी” कहा → बहू गुस्से में आकर घर छोड़ दिया → धारा 351(2)।
- सड़क पर ट्रैफिक झगड़ा किसी ने “अंधा, बेवकूफ” कहकर अपमान किया → सामने वाला गुस्से में आकर गाड़ी से टक्कर मारने की कोशिश → धारा 351(2)।
- दुकान में ग्राहक-दुकानदार का झगड़ा दुकानदार ने ग्राहक को “चोर, ठग” कहा → ग्राहक गुस्से में आकर दुकान तोड़ने लगा → धारा 351(2)।
- रिश्तेदारी में विवाद किसी ने “कमज़ोर, नामर्द” कहकर अपमान किया → सामने वाला उकसावे में आकर मारपीट → धारा 351(2)।
ध्यान रखो → अपमान ऐसा होना चाहिए कि शांति भंग की संभावना बन जाए। सिर्फ मजाक, हल्की टिप्पणी या नाराज़गी पर धारा नहीं लगती।
धारा 351(2) BNS में सजा कितनी होती है? (तालिका)
| स्थिति | सजा का प्रकार | अधिकतम सजा | जमानत मिलती है? | पुरानी IPC धारा |
|---|---|---|---|---|
| जानबूझकर अपमान + शांति भंग की संभावना | धारा 351(2) BNS | 2 साल कैद या जुर्माना या दोनों | हाँ | 504 IPC |
| अपमान + धमकी (criminal intimidation) | धारा 351(1) BNS | 2 साल तक कैद | हाँ | 503-506 IPC |
| अपमान + जातिसूचक गाली | धारा 351(2) BNS + SC/ST एक्ट | 2 साल + SC/ST सजा | नहीं | 504 + SC/ST |
जुर्माना → कोर्ट तय करता है – हजारों से लाखों तक हो सकता है। कैद → साधारण (simple) या कठोर (rigorous) – कोर्ट तय करता है।
जमानत मिलना आसान क्यों?
- जमानती अपराध है
- ज्यादातर मामलों में पुलिस स्टेशन से ही जमानत हो जाती है
- अगर अपमान बहुत गंभीर हो या SC/ST से जुड़ा हो तो जमानत में थोड़ी दिक्कत आ सकती है
- कोर्ट में जमानत आसानी से मिल जाती है अगर आरोपी पहली बार का अपराधी हो
असल जिंदगी में धारा 351(2) BNS के केस
- पड़ोस में गाली-गलौज → पड़ोसी ने “हरामी, कमीना” कहकर अपमान किया → सामने वाला गुस्से में आकर मारपीट शुरू → धारा 351(2) लगी।
- फेसबुक पर जातिसूचक कमेंट → “चमार, भंगी” लिखा → सामने वाला उकसावे में आकर धमकी दी → धारा 351(2) + SC/ST।
- ऑफिस में बॉस का अपमान → “नालायक, कमीना” कहा → कर्मचारी गुस्से में आकर झगड़ा किया → धारा 351(2)।
- सार्वजनिक जगह पर महिला का अपमान → “बेशर्म औरत” कहकर अपमान → महिला उकसावे में आकर चिल्लाई → धारा 351(2)।
धारा 351(2) BNS का दुरुपयोग कैसे होता है?
- छोटी बहस में “हरामी” कहकर धारा 351(2) लगा देना
- सोशल मीडिया पर पुरानी रंजिश में गंदा कमेंट करके FIR करवाना
- कोर्ट में ज्यादातर केस गवाह और सबूत के बिना कमजोर हो जाते हैं
- सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा – अपमान + उकसावे की संभावना साबित होनी चाहिए, वरना केस खारिज।
अगर तुम पर धारा 351(2) BNS लग गई हो तो क्या करोगे? (स्टेप-बाय-स्टेप)
- तुरंत वकील से मिलो
- अपमान के सबूत मंगवाओ (मैसेज, वीडियो, गवाह)
- ये साबित करो कि अपमान से शांति भंग की संभावना नहीं थी
- जमानत के लिए आवेदन दो (जमानत आसानी से मिल जाती है)
- अगर केस कमजोर हो तो कोर्ट में डिस्चार्ज या quash करवाओ
अगर किसी ने तुम्हारा अपमान किया हो तो क्या करोगे?
- सबूत इकट्ठा करो (ऑडियो, वीडियो, स्क्रीनशॉट)
- थाने में शिकायत करो (351(2) BNS मंगवाओ)
- अगर पुलिस न माने तो मजिस्ट्रेट के पास शिकायत
- अगर जातिसूचक अपमान हो तो SC/ST एक्ट के साथ जोड़ो
FAQ – सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल (20 जवाब)
धारा 351(2) BNS क्या है?
जानबूझकर अपमान करने की धारा है, जिससे शांति भंग हो सकती है।
धारा 351(2) BNS में कितनी सजा मिलती है?
अधिकतम 2 साल कैद या जुर्माना या दोनों।
धारा 351(2) BNS जमानती है या गैर-जमानती?
जमानती – जमानत आसानी से मिल जाती है।
धारा 351(2) और 351(1) में क्या फर्क है?
351(2) अपमान + उकसावा, 351(1) धमकी (criminal intimidation)।
सोशल मीडिया पर अपमान पर धारा 351(2) लगती है?
हाँ, अगर अपमान से उकसावा हो और शांति भंग की संभावना हो।
धारा 351(2) BNS में compounding हो सकती है?
हाँ, समझौता हो सकता है (compoundable offence)।
जातिसूचक गाली पर धारा 351(2) लगती है?
हाँ, और SC/ST एक्ट भी लग सकता है।
धारा 351(2) BNS में जमानत मिलती है?
हाँ, जमानती अपराध है।
धारा 351(2) BNS में FIR कैसे फाइल करें?
थाने में शिकायत करो या मजिस्ट्रेट के पास।
धारा 351(2) में कितने साल की सजा मिलती है?
अधिकतम 2 साल। ज्यादातर जुर्माना या कम सजा।
धारा 351(2) में जुर्माना कितना लगता है?
कोर्ट तय करता है – हजारों से लाखों तक।
धारा 351(2) BNS का दुरुपयोग कैसे रोकें?
अपमान और उकसावे की संभावना साबित करनी पड़ती है।
धारा 351(2) में ट्रायल कितने समय में होता है?
मजिस्ट्रेट कोर्ट में 6 महीने से 2 साल तक।
धारा 351(2) और 506 पुरानी IPC में क्या फर्क था?
351(2) अपमान + उकसावा, 506 धमकी।
धारा 351(2) में क्या बचाव संभव है?
हाँ, अगर अपमान मजाक था या उकसावा नहीं हुआ।
धारा 351(2) में क्या अपमान साबित करना जरूरी है?
हाँ, जानबूझकर अपमान + शांति भंग की संभावना।
धारा 351(2) BNS के सबसे बड़े केस कौन से हैं?
सोशल मीडिया अपमान, कार्यस्थल झगड़े, जातिसूचक कमेंट के केस।
धारा 351(2) में क्या FIR में 351(1) भी मंगवानी चाहिए?
हाँ, अगर अपमान के साथ धमकी भी हो तो 351(2) + 351(1)।
धारा 351(2) BNS में क्या गाली देने पर लगती है?
हाँ, अगर गाली से उकसावा हो और शांति भंग की संभावना हो।
धारा 351(2) BNS में क्या सजा कितने प्रतिशत मामलों में jail होती है?
ज्यादातर मामलों में जुर्माना या warning मिलती है। jail तभी जब अपमान बहुत गंभीर हो। conviction rate ~50-60% रहता है।
Conclusion
धारा 351(2) BNS जानबूझकर अपमान से शांति भंग करने की धारा है – सजा 2 साल तक कैद या जुर्माना। अगर अपमान से उकसावा हो तो ये धारा लगती है, लेकिन मजाक या हल्की टिप्पणी पर नहीं। अगर तुम्हारे साथ ऐसा हुआ है या तुम पर लग गई है, तो तुरंत सबूत इकट्ठा करो और वकील से मिलो। penalcodedetail.com पर और धाराएँ पढ़ते रहो – हम तुम्हारे साथ हैं। 🙏
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